साइक्लोन मॉन्था की धुंधली लेकिन खतरनाक छाया अब उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के लाखों लोगों के घरों तक पहुँच चुकी है। अंध्र प्रदेश के मच्छलीपट्टनम के पास 28 अक्टूबर को जमीन पर उतरने के बाद, यह तूफान धीरे-धीरे कमजोर हो रहा था, लेकिन उसके बाकी बचे हुए बादल और नमी का बोझ अब मिर्जापुर और वाराणसी विभागों के लिए बड़ी बारिश का खतरा बन चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के लखनऊ केंद्र ने 30 अक्टूबर को भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है — और यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं, बल्कि 29 से 31 अक्टूबर तक चलने वाली एक लंबी घटना है।
कैसे बदल गया मौसम, जब तूफान चला गया?
जब साइक्लोन मॉन्था अंध्र प्रदेश के तट पर टकराया, तो उसकी रफ्तार 65 किमी/घंटा थी — यह एक सामान्य तूफान था, लेकिन उसके बाद का असर किसी भयानक तूफान से कम नहीं। इसके बाद बारिश का केंद्र उत्तर की ओर बढ़ने लगा, और एक अजीब बात हुई: उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में तेजी से गिरावट आई। ओराई में अधिकतम तापमान में 9.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। यह न सिर्फ एक असामान्य घटना है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे एक दूर के तूफान भी उत्तर भारत के मौसम को बदल सकता है।
IMD के विशेषज्ञों के अनुसार, यह ठंडक एक पश्चिमी विक्षेप (western disturbance) और मध्य ट्रोपोस्फीयर में 70° पूर्व देशांतर पर स्थित एक ट्राउट के कारण हुई। ये तकनीकी शब्द सुनकर आप सोच सकते हैं कि यह क्या है? बस इतना समझिए: एक बड़ा हवाई धक्का, जो अरब सागर से आकर गुजरात से होते हुए मध्य प्रदेश तक गया, और उसके बाद उत्तर प्रदेश के आसमान में बादलों का जाल बिछ गया।
कौन-कौन से जिले खतरे में हैं?
IMD की आधिकारिक चेतावनी के अनुसार, 30 अक्टूबर को बलिया, घाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज और वाराणसी में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। इनके अलावा, गोरखपुर, देवरिया, मौ, अजमोल और जौनपुर में भी भारी बारिश हो सकती है।
इन जिलों के अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बिजली के झटके और 30-40 किमी/घंटा की तेज हवाएँ चलने की आशंका है। यह न सिर्फ बारिश की बात है — यह बिजली के खंभे, सड़कों, और खेतों के लिए एक जांच है।
क्या अंध्र प्रदेश में हुआ नुकसान?
साइक्लोन ने अंध्र प्रदेश में भी बड़ा नुकसान किया। कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, और 65 गाँवों से लगभग 10,000 लोगों को बाहर निकाला गया। लगभग 38,000 हेक्टेयर फसलें नष्ट हो गईं — यानी लगभग 57,000 फुटबॉल मैदानों के बराबर खेत। कई बिजली के खंभे गिर गए, और बिजली का बंद होना अब एक आम बात बन गया है।
यहाँ एक दिलचस्प बात: येडीआरसीपी के प्रमुख वाईएस जगन्मोहन रेड्डी ने तूफान के नुकसान की समीक्षा के लिए क्षेत्रीय नेताओं के साथ बैठक की योजना बनाई थी। लेकिन अब उनकी नजर उत्तर प्रदेश की ओर भी जा रही है — क्योंकि यह तूफान अब एक राष्ट्रीय समस्या बन चुका है।
क्या अगले दिन कुछ बदलेगा?
IMD के मुताबिक, 31 अक्टूबर के बाद तापमान में फिर से 4-6 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा खत्म हो गया। अगर बारिश बहुत तेज हुई, तो नदियाँ फैल सकती हैं — खासकर गंगा की सहायक नदियाँ जैसे गोमती और गोंडक। ग्रामीण इलाकों में जहाँ बुनियादी ढांचा कमजोर है, वहाँ बाढ़ का खतरा असली हो सकता है।
एक अनुमान के अनुसार, अगर 30 अक्टूबर को वाराणसी में 150 मिमी से अधिक बारिश हुई, तो यह उस जिले के लिए एक अत्यधिक घटना होगी — जो कि पिछले 15 साल में केवल दो बार हुई है।
क्या यह अभी भी साइक्लोन है?
नहीं। अब यह एक निम्न दबाव क्षेत्र बन चुका है। लेकिन यह अभी भी एक खतरा है। जैसे एक बुखार उतर जाता है, लेकिन बचे हुए बीमारी के लक्षण अभी भी रह जाते हैं — वैसे ही यह निम्न दबाव भी बारिश और ठंडक लाएगा। बिहार में भी इसके असर की उम्मीद है। जहाँ बारिश नहीं हुई थी, वहाँ अचानक बारिश हो जाएगी। और जहाँ पहले से ही भारी बारिश हो रही है, वहाँ यह नुकसान को दोगुना कर देगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मिर्जापुर और वाराणसी में भारी बारिश का क्या कारण है?
साइक्लोन मॉन्था के बाद बचे हुए नमी का बोझ और पश्चिमी विक्षेप के कारण उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बादल जम गए हैं। यह नमी अरब सागर से आकर मध्य प्रदेश से होते हुए उत्तर प्रदेश के तटीय क्षेत्रों तक पहुँची है। इसके अलावा, 70° पूर्व देशांतर पर स्थित ट्राउट ने बादलों को अटका दिया है, जिससे बारिश लंबे समय तक रुकी रहेगी।
क्या बारिश के कारण बाढ़ का खतरा है?
हाँ, खासकर गोमती, गोंडक और गंगा की सहायक नदियों के किनारे के गाँवों में। अगर 30 अक्टूबर को मिर्जापुर या वाराणसी में 120 मिमी से अधिक बारिश हुई, तो नदियों का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुँच सकता है। पिछले 10 साल में ऐसी बारिश केवल दो बार हुई है — 2019 और 2023 में, जब दोनों बार बाढ़ आई थी।
तापमान में इतनी गिरावट क्यों हुई?
साइक्लोन के बाद बादलों ने सूरज की किरणों को रोक दिया, और पश्चिमी विक्षेप के कारण ठंडी हवाएँ उत्तर की ओर बहने लगीं। ओराई में 9.8 डिग्री की गिरावट इसी का नतीजा है। ऐसा अक्सर तब होता है जब दक्षिण से आने वाला तूफान और उत्तर से आने वाली ठंडी हवाएँ आमने-सामने हो जाती हैं।
क्या बिजली के खंभे और ट्रांसमिशन लाइनें सुरक्षित हैं?
नहीं। अंध्र प्रदेश में कई खंभे गिर चुके हैं, और उत्तर प्रदेश में भी 30-40 किमी/घंटा की तेज हवाएँ चलने की संभावना है। यह खंभों को तोड़ सकती है, खासकर पुराने या जंग लगे खंभों को। बिजली कंपनियों ने तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली लंबे समय तक नहीं आ सकती।
क्या फसलों को नुकसान होगा?
हाँ। अंध्र प्रदेश में 38,000 हेक्टेयर फसलें नष्ट हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में अभी अरहर, चना और गेहूँ की फसलें बढ़ रही हैं। अगर 30-31 अक्टूबर को भारी बारिश हुई, तो इन फसलों को भी नुकसान हो सकता है — खासकर जहाँ खेत नीचे हैं या बहुत अधिक नमी है।
अगले दिन क्या उम्मीद करें?
31 अक्टूबर के बाद तापमान 4-6 डिग्री बढ़ सकता है, लेकिन बारिश अभी भी जारी रह सकती है। अगले 48 घंटों में बारिश धीरे-धीरे कम होगी, लेकिन जिन जिलों में अभी बारिश हो रही है, वहाँ जमीन अभी भी सींची हुई है। इसलिए अगले दो दिनों में बाढ़ और सड़कों के नुकसान की संभावना अभी भी बनी हुई है।